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मिथक: बायोपà¥à¤¸à¥€ से कैंसर फैलता है
तथà¥à¤¯: कई सालों से, रोगियों और यहां तक कि कà¥à¤› चिकितà¥à¤¸à¤•ों का मानना था कि बायोपà¥à¤¸à¥€ के बाद कैंसर कोशिकाà¤à¤‚ शरीर के अनà¥à¤¯ हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में फैल सकती हैं। हालांकि, इस धारणा को मानने के लिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ उपयà¥à¤•à¥à¤¤ साइंटिफिक à¤à¤µâ€à¤¿à¤¡à¥‡à¤‚स (वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• सबूत) नहीं हैं। जबकि कà¥à¤› मामलों में à¤à¤¸à¤¾ पाया गया कि दà¥à¤°à¥à¤²à¤ केस में à¤à¤¸à¤¾ हो सकता है। सैंपल कलेकà¥â€à¤¶à¤¨ के दौरान कैंसर कोशिकाओं को फैलने से रोकने के लिठसà¤à¥€ आवशà¥à¤¯à¤• कदम उठाकर इसको पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ ढंग से टाला जा सकता है।
इस धारणा को दूर करने के लिà¤, जैकà¥à¤¸à¤¨à¤µà¤¿à¤²à¥‡, फà¥à¤²à¥‹à¤°à¤¿à¤¡à¤¾ में मेयो कà¥à¤²à¤¿à¤¨à¤¿à¤• के परिसर में शोधकरà¥à¤¤à¤¾à¤“ं दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ किया गया था। अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ में यह निषà¥à¤•रà¥à¤· निकला कि जिन रोगियों की बायोपà¥à¤¸à¥€ हà¥à¤ˆ थी, उन रोगियों में बेहतर परिणाम और लंबे समय तक जीवित रहने की दर थी जबकि जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बायोपà¥à¤¸à¥€ के लिठमना कर दिया था उनमें परिणाम और लंबे समय तक जीवित रहने की दर कम पाई गई थी।
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